Jazbaat…

ना वक्त तन्हा ना मैं तन्हा…

Na waqt tanha, na main tanha…

फिर भी है ये तनहाई का आलम…
Fir b hai ye tanhai ka alam

ना तू रुसवा ना मैं रुसवा…
Na tu ruswa, na main ruswa….

तो क्यूं लगा बेवफाई का इलज़ाम
To kyun lga bewafai ka ilzaam

ना दिल टूटा, ना ख्वाब टूटे…
Na dil toota, na khwaab toote…

फिर भी हंसता रहा हम पर जहां
Fir bhi hasta rha hum per jahaan

ना आह निकली ना लफ्ज़ निकले….
Na aah nikli, na lafz nikle….

फिर भी हो गया अफ़साना ब्यान…
Fir bhi ho gya afsana byaan…