डरने लगे….

यादों के झरोखों में जाने से डरने लगे,

हम खुद अपनी परछाइयों से डरने लगे,

ख्वाब देखा जो कल-तोड़ दिया वक्त ने,

हम बेबस हो वक्त की घातों से डरने लगे,

तुमने ला के यूं छोड़ा हमें रस्ते पर,

हम मंज़िल की राहों से ही डरने लगे,

दर्द उठता है दिल में तेरे ख्याल भर से,

शायद यूं हम तेरे अज़ीज़ ख्यालों से डरने लगे…

.
Translation
Since memories of past haunt me,

I now get scared from my own shadows,

Time shattered away all my dreams

I now get scared from the pace of time,

The way you abandoned me in midway,

I now get scared from every path I walk on,

My heart aches whenever I remember you,

May that’s why I now get scared remembering you…..

ज़िंदगी

जज़बातों से भरी हुई

Jazbaaton se bhari hu,

तुझ बिन वीरान है जिंदगी….

Tujh bin viraan hai zindagi….
आज यादों का झोंका यूँ चला

Aj yaadon ka jhonka yun chala

कि रुख से पर्दा उड़ गया

Ki rukh se parda udd gya

आँखों में आँसू ना सही

Aankhon mey aansu na sahi

लेकिन कुछ परेशान है ज़िंदगी….

Lekin kuch pareshaan hai zindagi….
दिल के हाथों मजबूर थे कभी

Dil k hathon majbur the kabhi

आज हालातों ने मजबूर कर दिया

Aj halaaton ne majbur kar dia

सफर है एक अंजानी मन्ज़िल का

Safar hai ek anjaani manzil ka

और सामान है ज़िंदगी…..

Aur samaan hai zindagi….
कहते हैं वक्त बदल देता है

Kehte hain waqt badal deta hai 

अपने साथ ज़माने को

Apne sath zamaane ko

आज खुद को आईने में देख

Aaj khud ko aaine mey dekh

 जाने क्यों हैरान है ज़िंदगी…

Jaane kyun hairaan hai zindagi…

दिल का दर्द

इस पत्थर दिल ज़माने से

दिल का दर्द छुपा रखा है

आज फिर तुम याद आ गए

वर्ना अर्से से तुम्हें भुला रखा है

क्या पता था इस मोड़ पर हम तन्हा रह जाएंगे

वर्ना सामां हमने भी सफर का बांध रखा है

हैं बहुत हमें भी दिलासा देने वाले

तुमने किसलिए हमसे रिश्ता ये बना रखा है

दिल में लाख चुभे थे कांटे किसी ज़माने में

शायद तभी इसे आज दामन से छुपा रखा है

है दस्तूर ज़माने का रिश्तों को दफ़न कर देना 

मैंने भी कब्र को अपनी बुनियाद बना रखा है…


Translation:

From this hard hearted world

I’ve hidden my heart’s deepest pain
You’re being remembered today

Else I’d forgotten you since ages

Who knew I’d be left abandoned like this

 Else I too had packed up for life’s journey

There are many to console me

Then why are you still connected to me

My heart had been hurt badly in the past

Maybe thats why I hide it from the world

It’s a ritual to bury relations in this world

And so I’ve laid my coffin as my foundation…

एक एहसास…

दुआओं में मेरी कुछ तो असर रहा है
​Duaon mey meri kuch to asar rha hai

यूं ही नहीं तूने पलट के अलविदा कहा है….

Yun hi nhi tune palat k alvida kaha hai…

हमनफज, हमनशीं, हमसफर ना सही

Humnafaz, humnashin, humsafar na sahi

कम से कम हमदर्द तो तू मेरा रहा है….

Kumse kum Hamdard to tu mera raha hai…

जुदा होंंगें रास्ते ये खबर तो थी हमें

Juda honge raaste ye khabar to thi humein

हमारा साथ इस मोड़ तक मुल्तवी हुआ है….

Humara sath iss Mod tak multavvi hua hai…

खो जाएंगे ये मन्ज़र फिर ना जाने कहां

Kho jayenge ye manzar fir na jaane kahan

बीत जाएगा ये वक्त जो अभी ठहरा हुआ है…..

Beet jayega ye waqt jo abhi thehra hua hai…

गुज़रे लम्हों को जो देखेंगे तो महसूस होगा

Guzre lamho ko jo dekhenge to mehsus hoga

एक खास रिश्ता है जो हमें जोड़े रहा है….

Ek khaas rishta h jo humein jode rha hai….

जैसे…

है आरजू या तो बेपनाह
या ख्वाहिश अधूरी रह गई हो जैसे

थम रही हैं ये सांसें

या फिर वक्त ही थम गया हो जैसे…..

मुझे दस्तूर-ए-जमाने का इल्म नहीं

बंदिशें ताउम्र मुझपर लगी हों जैसे

उड जाऊं बेबाक परिंदे की तरह

अरमानों ने पंख लगा लिए हों जैसे…..

दर्द आंखों में यूं दिखाई नहीं देता

लबोंं पर हसीं सजा रखी हो जैसे

जी लूं हर इक पल को कुछ इस तरह

जिंदगी इसी आलम में गुजर जाएगी जैसे…..

नहीं होता

 

कुछ ऐसे रिश्ते भी होते हैं

जिनका कोई नाम नहीं होता

एक ऐसा सफर जहां हमसफर तो है

लेकिन उस सफर का अंजाम नहीं होता

उमर् गुजर जाती है समझने में

वक्त के सबक का लिहाज नहीं होता

कभी फुर्सत से ब्योरा देंगे तुझे जिंदगी

कुछ जज्बात चंद अल्फाजों में ब्यान नहीं होता

आज भी…

शहर के उस पुराने मकान में

कोई रहता है आज भी

उस फकीर के मकबरे में

दीया जलता है आज भी

यूँ तो जमाना बदलता रहता है

कल भी बदला था

वो बदलता है आज भी

इस जमाने की तूफानी हवाओं का सामना

मेरी जिंदगी का दीया करता है आज भी

आज भी परवाने शम्मा की राह पर

जलकर मर जाते हैं

हर गली हर शहर से

मोहब्बत का जनाजा निकलता है आज भी

आज भी रात ख्वाब दिखाकर

तोड दिया करती है

इस अंधी दुनिया को रोशनी देने

सूरज निकलता है आज भी

आज भी किसी की नजर

तकती है एक बेजान से रस्ते को

किसी के दिल से सर्द आह

निकलती है आज भी

शहर के उस पुराने मकान में

कोई रहता है आज भी….|

रात भर!

 

सितारों भरी रात और समां कुछ वीराना था

मेरी मय्यत पर वो दीए जलाते रहे रात भर,

उनकी खामोश निगाहें कुछ नम सी थीं,

हम भी रोते रहे और वो रुलाते रहे रात भर,

जुदाई का असर कुछ यू़ं हुआ हमारे ऊपर

हम आए नहीं और वो बुलाते रहे रात भर,

खुदा गवाह था हमारी वफा-ए-मोहब्बत का शायद

अपनी वफाओं का सिला मांग, हम भी उन्हें सताते रहे रात भर

उनकी आखों में इक टूटा ख्वाब झलकता है आज

हम उन्हें नए ख्वाब दिखाते रहे रात भर,

रात भर हम तारों से भरे आसमां को तकते रहे,

वो हमें और हम उन्हें जगाते रहे रात भर !